1. मोह्हबत हो जाती है
ये बुलाकर नही
आती,
लगन सच्ची हो तो सताकर नही जाती,
बस सोच सोच की ही तो बात है यारों,
दिल अगर टूट जाये तो आवाज नहीं आती।
लगन सच्ची हो तो सताकर नही जाती,
बस सोच सोच की ही तो बात है यारों,
दिल अगर टूट जाये तो आवाज नहीं आती।
2. कभी मैं उसके
हर जज्बात का
हिस्सा था,
कभी मैं उसके दिन-रात का एक हिस्सा था,
वो चंद पलों में हमें नजरअंदाज कर गए,
क्या हमारी मोह्हबत का यही किस्सा था ।
कभी मैं उसके दिन-रात का एक हिस्सा था,
वो चंद पलों में हमें नजरअंदाज कर गए,
क्या हमारी मोह्हबत का यही किस्सा था ।
3. ये ज़िन्दगी न जाने कैसे कैसे
खेल दिखाती है,
काम अच्छा करो तो भी बहुत सताती है,
जिस दिन हर शख्श की जुबान पर आपका नाम हो,
तो पूरी दुनिया आपके कदमो में नजर आती है।
काम अच्छा करो तो भी बहुत सताती है,
जिस दिन हर शख्श की जुबान पर आपका नाम हो,
तो पूरी दुनिया आपके कदमो में नजर आती है।
4. चल पड़ा हूँ
राह में चलता
ही रहूंगा,
सूरज की तरह निकलता और चमकता रहूँगा,
राह में आने वाली हर अड़चन को मैं,
अपने पैरों तले मसलता रहूँगा।
सूरज की तरह निकलता और चमकता रहूँगा,
राह में आने वाली हर अड़चन को मैं,
अपने पैरों तले मसलता रहूँगा।
5. कामयाबी के सफर में
उम्मीदों का काफ़िला रख
ले,
मन के हर कोने में ,जनून का ज़लज़ला रख ले,
मैदान मारना हो तो डटे रहो रहो मैदान में,
मिलेगी कामयाबी बस चलने का हौसला रख ले।
मन के हर कोने में ,जनून का ज़लज़ला रख ले,
मैदान मारना हो तो डटे रहो रहो मैदान में,
मिलेगी कामयाबी बस चलने का हौसला रख ले।
6. तेरे मासूम चेहरे
की रंगत रंग
लाती है,
तेरी हर अदा मेरे दिल मे बस जाती है,
जिसकी ज़िंदगी मे तुम जैसा यार हो,
कसम से उसकी जिंदगी ही संवर जाती है।
तेरी हर अदा मेरे दिल मे बस जाती है,
जिसकी ज़िंदगी मे तुम जैसा यार हो,
कसम से उसकी जिंदगी ही संवर जाती है।
7. परिंदो को पता
है कि सफर
क्या है,
राही को पता है कि राह का मंजर क्या है,
जब कभी मंजिल को पाने में तुम डगमगाए,
पता करो कि राह -ए-मंजिल में कसर क्या है।
राही को पता है कि राह का मंजर क्या है,
जब कभी मंजिल को पाने में तुम डगमगाए,
पता करो कि राह -ए-मंजिल में कसर क्या है।
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