Friday, August 10, 2018

मैं और मेरी शायरी



ज़मीं पर चलता हूँ, आसमानी रास्तों में चलना पसंद नहीं,
हर पल मस्ती में रहता हूँ, बेवजह मचलना पसंद नही,
काफी लोग मेरे करीब हैं, बहुत से लोग पास नहीं आते,
वजह बस  ये है मुझे मतलब का रिश्ता रखना पसंद नहीं।

सुनता हूँ सबकी बातें मैं, किसी की बात पर पकना पसंद नहीं।
जो हमारी शराफत का फायदा उठा ले, उसे दिल मे रखना पसंद नहीं,
मिलता हूँ सभी से अक्सर मैं दिल के दरवाज़े खोलकर,
वजह बस ये है,मुझे मतलब का रिश्ता रखना पसंद नहीं

कुछ लोग अपनी सुना लेते हैं, कुछ को अपनी सुना लेता हूँ
करने पे गया तो अच्छे अच्छे को  उनकी औकात बता देता हूँ,
कुछ ऐसे भी है जो खुद ही अपनी औकात पे जाते हैं
पर मन कुछ ऐसा है  मेरा कि  उन सबको भी गले लेता हूँ

अच्छे लोगों  को  हमें  कभी  परखना पसन्द  नहीं,
धोखेेबाज़ी  का स्वाद  हमें कभी चखना  पसन्द नहीं,
बिना फायदे होने के मिल लेते हैं हम तमाम लोगों से,
बजह बस ये  है, मुझे मतलब  का रिश्ता  पसंद नही। 



                             एंकर संजय ठाकुर
                             +919817018596
                             skthakur596@gmail.com

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